Friday, March 30, 2018

हनुमान जयंती उपासना


हनुमान जयंती उपासना⛺🐒🌞

कौन सो संकट मोर गरीब को

जो तुमसे नहीं जाट है टारो

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होय हमारो.... 

महावीर हनुमान महाकाल शिव के 11 वें रुद्रावतार हैं, जिनकी विधिवत् उपासना करने से सभी बाधाओं का नाश होता है। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा या सुन्दरकांड का पाठ करना चाहिए। हनुमान जी के पाठ से भूत बाधा,प्रेत बाधा,ऊपरी बाधा का निवारण होता हैा सर्व कष्टों अर्थात नौकरी,व्यापार में बाधा एवं रोगों का निवारण भी हनुमान जी के पाठ से हो जाता है। 

ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो हनुमान जी अपने भक्तों के लिए ना कर सकें, बस आवश्यकता है सच्चे मन से उन्हें याद करने की।

हनुमान जयंती के दिन अपनी राशि अनुसार विशिष्ट मंत्रों का जप करें तो सभी कामनाओं की पूर्ति संभव है। 

मेष: ॐ सर्वदुख हराय नम:

वृषभ: ॐ  कपिसेनानायक नम:

मिथुन: ॐ मनोजवाय नम:

कर्क: ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नम:

सिहं: ॐ परशौर्य विनाशन नम:

कन्या: ॐ पंचवक्त्र नम:

तुला: ॐ सर्वग्रह विनाशी नम:

वृश्चिक: ॐ सर्वबंधनविमोक्त्रे नम:

धनु: ॐ चिरंजीविते नम: 

मकर: ॐ सुरार्चिते नम:

कुंभ: ॐ वज्रकाय नम:

मीन:  ॐ कामरूपिणे नम:

Dr.Suhas Rokde,
Astrologer

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Thursday, November 30, 2017

24 guru of prabhu duttatray


कौन है भगवान दत्तात्रेय और उनके २४ गुरु

भगवान दत्तात्रेय ब्रह्माजी के मानस पुत्र ऋषि अत्रि के पुत्र हैं। इनकी माता का नाम अनुसूइया था। कई ग्रंथों यह बताया गया है कि ऋषि अत्रि और अनुसूइया के तीन पुत्र हुए। ब्रह्माजी के अंश से चंद्रमा, शिवजी के अंश से दुर्वासा ऋषि, भगवान विष्णु के अंश दत्तात्रेय का जन्म हुआ। कहीं-कहीं यह उल्लेख भी मिलता है कि भगवान दत्तात्रेय ही ब्रह्मा, विष्णु और शिव के सम्मिलित अवतार हैं। ( भगवान दत्तात्रेय के जन्म की कथा यहाँ पढ़े – कथा अनुसुइया की जिसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को बना दिया था बालक )

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु :

पृथ्वी- सहनशीलता व परोपकार की भावना सीख सकते हैं। पृथ्वी पर लोग कई प्रकार के आघात करते हैं, कई प्रकार के उत्पात होते हैं, कई प्रकार खनन कार्य होते हैं, लेकिन पृथ्वी हर आघात को परोपकार का भावना से सहन करती है।

पिंगला वेश्या-  पिंगला नाम की वेश्या से दत्तात्रेय ने सबक लिया कि केवल पैसों के लिए जीना नहीं चाहिए। वह वेश्या सिर्फ पैसा पाने के लिए किसी भी पुरुष की ओर इसी नजर से देखती थी वह धनी है और उससे धन प्राप्त होगा। धन की कामना में वह सो नहीं पाती थी। जब एक दिन पिंगला वेश्या के मन में वैराग्य जागा तब उसे समझ आया कि पैसों में नहीं बल्कि परमात्मा के ध्यान में ही असली सुख है, तब उसे सुख की नींद आई।

कबूतर- कबूतर का जोड़ा जाल में फंसे बच्चों को देखकर खुद भी जाल में जा फंसता है। इनसे यह सबक लिया जा सकता है कि किसी से बहुत ज्यादा स्नेह दु:ख ही वजह होता है।

सूर्य- सूर्य से दत्तात्रेय ने सीखा कि जिस तरह एक ही होने पर भी सूर्य अलग-अलग माध्यमों से अलग-अलग दिखाई देता है। आत्मा भी एक ही है, लेकिन कई रूपों में दिखाई देती है।

वायु- जिस प्रकार अच्छी या बुरी जगह पर जाने के बाद वायु का मूल रूप स्वच्छता ही है। उसी तरह अच्छे या बुरे लोगों के साथ रहने पर भी हमें अपनी अच्छाइयों को छोडऩा नहीं चाहिए।

हिरण- हिरण उछल-कूद, संगीत, मौज-मस्ती में इतना खो जाता है कि उसे अपने आसपास शेर या अन्य किसी हिसंक जानवर के होने का आभास ही नहीं होता है और वह मारा जाता है। इससे यह सीखा जा सकता है कि हमें कभी भी मौज-मस्ती में इतना लापरवाह नहीं होना चाहिए।

समुद्र- जीवन के उतार-चढ़ाव में भी खुश और गतिशील रहना चाहिए।

पतंगा- जिस प्रकार पतंगा आग की ओर आकर्षित होकर जल जाता है। उसी प्रकार रूप-रंग के आकर्षण और झूठे मोह में उलझना नहीं चाहिए।

हाथी- हाथी हथिनी के संपर्क में आते ही उसके प्रति आसक्त हो जाता है। अत: हाथी से सीखा जा सकता है कि संयासी और तपस्वी पुरुष को स्त्री से बहुत दूर रहना चाहिए।

आकाश- दत्तात्रेय ने आकाश से सीखा कि हर देश, काल, परिस्थिति में लगाव से दूर रहना चाहिए।

जल- दत्तात्रेय ने जल से सीखा कि हमें सदैव पवित्र रहना चाहिए।

मधुमक्खी – मधुमक्खियां शहद इकट्ठा करती है और एक दिन छत्ते से शहद निकालने वाला सारा शहद ले जाता है। इस बात से ये  सीखा जा सकता है कि आवश्यकता से अधिक चीजों को एकत्र करके नहीं रखना चाहिए।

मछली- हमें स्वाद का लोभी नहीं होना चाहिए। मछली किसी कांटे में फंसे मांस के टुकड़े को खाने के लिए चली जाती है और अंत में प्राण गंवा देती है। हमें स्वाद को इतना अधिक महत्व नहीं देना चाहिए, ऐसा ही भोजन करें जो सेहत के लिए अच्छा हो।

कुरर पक्षी- कुरर पक्षी से सीखना चाहिए कि चीजों को पास में रखने की सोच छोड़ देना चाहिए। कुरर पक्षी मांस के टुकड़े को चोंच में दबाए रहता है, लेकिन उसे खाता है। जब दूसरे बलवान पक्षी उस मांस के टुकड़े को देखते हैं तो वे कुरर से उसे छिन लेते हैं। मांस का टुकड़ा छोड़ने के बाद ही कुरर को शांति मिलती है।

बालक- छोटे बच्चे से सीखा कि हमेशा चिंतामुक्त और प्रसन्न रहना चाहिए।

आग- आग से दत्तात्रेय ने सीखा कि कैसे भी हालात हों, हमें उन हालातों में ढल जाना चाहिए। जिस प्रकार आग अलग-अलग लकडिय़ों के बीच रहने के बाद भी एक जैसी ही नजर आती है।

चन्द्रमा- आत्मा लाभ-हानि से परे है। वैसे ही जैसे घटने-बढऩे से भी चंद्रमा की चमक और शीतलता बदलती नहीं है, हमेशा एक-जैसे रहती है। आत्मा भी किसी भी प्रकार के लाभ-हानि से बदलती नहीं है।

कुमारी कन्या- कुमारी कन्या से सीखना चाहिए कि अकेले रहकर भी काम करते रहना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए। दत्तात्रेय ने एक कुमारी कन्या देखी जो धान कूट रही थी। धान कूटते समय उस कन्या की चूडिय़ां आवाज कर रही थी। बाहर मेहमान बैठे थे, जिन्हें चूडिय़ों की आवाज से परेशानी हो रही थी। तब उस कन्या ने चूडिय़ों आवाज बंद करने के लिए चूडिय़ां ही तोड़ दी। दोनों हाथों में बस एक-एक चूड़ी ही रहने दी। इसके बाद उस कन्या ने बिना शोर किए धान कूट लिया। अत: हमें ही एक चूड़ी की भांति अकेले ही रहना चाहिए।

शरकृत या तीर बनाने वाला-  अभ्यास और वैराग्य से मन को वश में करना चाहिए। दत्तात्रेय ने एक तीर बनाने वाला देखा जो तीर बनाने में इतना मग्न था कि उसके पास से राजा की सवारी निकल गई, पर उसका ध्यान भंग नहीं हुआ।

सांप- दत्तात्रेय ने सांप से सीखा कि किसी भी संयासी को अकेले ही जीवन व्यतीत करना चाहिए। साथ ही, कभी भी एक स्थान पर रुककर नहीं रहना चाहिए। जगह-जगह ज्ञान बांटते रहना चाहिए।

मकड़ी- मकड़ी से दत्तात्रेय ने सीखा कि भगवान भी माय जाल रचते हैं और उसे मिटा देते हैं। जिस प्रकार मकड़ी स्वयं जाल बनाती है, उसमें विचरण करती है और अंत में पूरे जाल को खुद ही निगल लेती है, ठीक इसी प्रकार भगवान भी माया से सृष्टि की रचना करते हैं और अंत में उसे समेट लेते हैं।

भृंगी कीड़ा- इस कीड़े से दत्तात्रेय ने सीखा कि अच्छी हो या बुरी, जहां जैसी सोच में मन लगाएंगे मन वैसा ही हो जाता है।

भौंरा – भौरें से दत्तात्रेय ने सीखा कि जहां भी सार्थक बात सीखने को मिले उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। जिस प्रकार भौरें अलग-अलग फूलों से पराग ले लेती है।

अजगर- अजगर से सीखा कि हमें जीवन में संतोषी बनना चाहिए। जो मिल जाए, उसे ही खुशी-खुशी स्वीकार कर लेना चाहिए।

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Monday, October 30, 2017

आदर्श गाव निर्मिती मॉडेल- संकलन डॉ.सुहास


पाटोदा .....
*एक आगळेवेगळे आदर्श गाव🙏🙏🙏*

औरंगाबाद पासून फक्त ७ कि मी अंतरावर पाटोदा गाव आहे. गावाची लोकसंख्या पुरुष १६५४ स्त्री १६९६ एकूण ३३५० आहे
  केंद्रशासना मार्फत ग्रामविकास अभ्यासाकरिता देशातील ११ गावांत पाटोदा ग्रामपंचायतची निवड .
   *गावाचे आगळेवेगळे उपक्रम👇👇*
१) गावात एकच पिठाची गिरणी आहे.जे ग्रामपंचायतचा कर १०० % भरतात त्यांना वर्षभर दळण मोफत दळून मिळते.
२) गावात चार प्रकारचे पाणी उपलब्ध आहे.
i) पिण्याचे R/o पाणी
ii) वापरायचे पाणी
iii) साधे पाणी
iv) गरम पाणी
  पिण्याचे आर ओ पाणी प्रत्येक दिवशी २० ली मोफत.ATM द्वारे चोवीस तास ८० रुपयांत १२००० ली पाणी मिळते.
वापरायचे व साधे पाणी २ वेगवेगळ्या नळाद्वारे २४ तास पाणी उपलब्ध.
  गरम पाणी सकाळी ५ते ९ वाजेपर्यंत मोफत उपलब्ध आहे. हे पाणी सौर उर्जेवर तापविले जाते.
३) ओला व सुका कचऱ्यासाठी दोन वेगवेगळ्या बकेटद्वारे कचरा ट्रक्टरच्या साहाय्याने गोळा केला जातो . त्या पासून कंपोस्ट खत तयार केले जाते.
४) गावातील अथवा बाहेरील नागरिक मंदिराला देणगी न देता ग्रा.पं. ला देणगी देतात. ग्रा पं मासिक जमा खर्च दरमहा नोटीस बोर्डवर प्रसिध्द करते.
५) गावात ४२ CCTV बसविण्यात आलेले आहेत.
६) गावात १२ ठिकाणी थंड पाण्याचे कुलर बसविण्यात आलेले आहेत.
७) नागरिकांना शुध्द पाणी पिण्यासाठी जल शुध्दीकरण प्रकल्प कार्यान्वित आहे.
८) सर्व शासकिय कर्मचाऱ्यांसाठी बायोमॅट्रीक हजेरी आहे.
९ ) संपर्कासाठी पदाधिकारी, अधिकारी व कर्मचारी यांच्यात मोबाईल ग्रुप कार्ड आहे.
१०) लोकसंखेच्या दुप्पट गावात फळझाडे आहेत.
११ ) एकही नागरिक मळ्यात अथवा वस्तीवर राहत नाही.
१२) हात धुण्यासाठी गावात ठिकठिकाणी वॉश बेसिन बसविलेले आहेत.
१३) ठिकठिकाणी वयोवृद्धांना बसण्यासाठी खुर्च्या व बाके आहेत.
१४) गावाचे एकाच ठिकाणी सर्व सांडपाणी जमा केलेले आहेत, ते पाणी शेतीला वापरतात.
१५) गावात १ली ते ८वी पर्यंत जि प ची शाळा असून शाळा डिजिटल व गुणवत्ता पूर्ण आहेत.
१६) गावात सात दिवसाचा सप्ताह होत नसून प्रत्येक महिन्याच्या चौथ्या शनिवारी किर्तन व सर्व गावकऱ्यांना देणगीदार मोफत जेवन देतो.
१७) गावात ग्रा. पं. द्वारे सामुदायिक विवाह पार पडतो.
१८) गावात प्रत्येक नागरिकाचा वाढदिवस साजरा केला जातो.
१९ ) सगळ्या संस्थांच्या खेळीमेळीच्या वातावरणात निवडणूका पार पडतात पण गावात कोणताच राजकिय पक्ष नाही.
२०) प्रशासकिय सेवेत काम करणारे अधिकारी व कर्मचारी यांना सन्मानपत्र देऊन पुरस्कार दिला जातो.
२१) घनकचरा व्यवस्थापनासाठी प्रत्येक खातेदारास पर्यावरण पिशवी दिली जाते.
२२) गावात सगळीकडे पेव्हर ब्लॉक बसविण्यात आलेले आहेत.
२३) गाव तंटामुक्त , निर्मलग्राम राष्ट्रपती पारितोषिक विजेते आहेत.
२४) धुणी धुण्यासाठी गावात सार्वजनिक धोबी घाट बांधलेले आहेत .
२५ ) ग्रामपंचायतचे वार्षिक उत्पन्न २५ लाख रूपये आहेत .
२६) औरंगाबादच्या सांडपाण्यावर १०२५ हेक्टर जमिन ओलिताखाली आहेत
२७) ग्रामपंचायत कार्यालयात  व सभागृहात वातानूकुलित ( ए सी) यंत्रणा बसविण्यात आलेली आहेत.
   असे हे आगळेवेगळे आदर्श गाव



🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
मित्रांनो आपल्या गावात आशी व्यवस्था व्हावी वाटेत आसेल तर गावातील सर्व नागरिकांना हा मेसेज पाठवा आणि प्रत्येकाने आपापल्या पद्धतीने काम केले तर आपलेही गाव आदर्श गाव बनेल
धन्यवाद

ही बातमी आपल्या *सरपंचा*पर्यंत जाऊ द्या........

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Friday, September 22, 2017

उबुन्टु ( UBUNTU ) कथा


उबुन्टु ( UBUNTU ) एक सुंदर कथा...!

उबुन्टु ऑपरेटिंग सिस्टम
( Ubuntu Operating System )

जानते हैं, किससे प्रेरित है इस ऑपरेटिंग सिस्टम का नाम ?
👇
कुछ आफ्रिकन आदीवासी बच्चों को एक मनोविज्ञानी ने एक खेल खेलने को कहा।

उसने एक टोकरी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए।

बच्चों को वृक्ष से 100 मीटर दूर खड़े कर दिया।

फिर उसने कहा कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकरी के सारे स्वीट्स मिलेंगे।

जैसे ही उसने, रेड़ी स्टेडी गो कहा.....

तो जानते हैं उन छोटे बच्चों ने क्या किया ?

सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए, पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे।

जब मनोविज्ञानी ने पूछा कि, उन लोगों ने ऐंसा क्यों किया ?
 
तो उन्होंने कहा---" उबुन्टु ( Ubuntu ) "

जिसका मतलब है,

" कोई एक व्यक्ति कैसे खुश रह सकता है जब, बाकी दूसरे सभी दुखी हों ? "

उबुन्टु ( Ubuntu ) का उनकी भाषा में मतलब है,

" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं! "

सभी पीढ़ियों के लिए एक सुन्दर सन्देश,
आइए इस के साथ सब ओर जहाँ भी जाएँ, खुशियाँ बिखेरें,

आइए उबुन्टु ( Ubuntu ) वाली जिंदगी जिएँ.....

" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं..!! "
I am,because we are.
👍👍👍

साथ सदैव बना रहै...!

आपका ज्योतिषमित्र
डॉ.सुहास रोकडे
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Wednesday, July 26, 2017

Vah 7 din - ebook - Dr.Suhas

वह सात दिन by सुहास शेषराव रोकडे http://dhunt.in/2BWhV?ss=com.google.android.apps.blogger via Dailyhunt

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Thursday, July 6, 2017

मृत्यू की तिथी जानने की विधी -डॉ.सुहास

मृत्यु का रहस्य

किरलियान फोटोग्राफी ने मनुष्‍य के सामने कुछ वैज्ञानिक तथ्‍य उजागर किये हैं। किरलियान ने मरते हुए आदमी के फोटो लिए, उसके शरीर से ऊर्जा के छल्‍ले बाहर लगातार विसर्जित हो रहे थे, और वो मरने के तीन दिन बाद तक भी होते रहे। मरने के तीन दिन बाद जिसे हिन्‍दू तीसरा मनाता है।

अब तो वह जलाने के बाद औपचारिक तौर पर उसकी हड्डियाँ उठाना ही तीसरा हो गया। यानि अभी जिसे हम मरा समझते हैं वो मरा नहीं है। आज नहीं कल वैज्ञानिक कहते हैं तीन दिन बाद भी मनुष्‍य को जीवित कर सकेगें।

और एक मजेदार घटना किरलियान के फोटो में देखने को मिली। की जब आप क्रोध की अवस्‍था में होते हो तो तब वह ऊर्जा के छल्‍ले आपके शरीर से निकल रहे होते हैं। यानि क्रोध भी एक छोटी मृत्‍यु तुल्‍य है।

एक बात और किरलियान ने अपनी फोटो से सिद्ध की कि मरने से ठीक छह महीने पहले ऊर्जा के छल्‍ले मनुष्‍य के शरीर से निकलने लग जाते हैं। यानि मरने की प्रक्रिया छ: माह पहले शुरू हो जाती है, जैसे मनुष्‍य का शरीर मां के पेट में नौ महीने विकसित होने में लेता है वैसे ही उसे मिटने के लिए छ: माह का समय चाहिए। फिर तो दुर्घटना जैसी कोई चीज के लिए कोई स्‍थान नहीं रह जाता, हां घटना के लिए जरूर स्‍थान है।

भारत में हजारों साल से योगी मरने के छ:माह पहले अपनी तिथि बता देते थे।

ये छ: माह कोई संयोगिक बात नहीं है। इस में जरूर कोई रहस्‍य होना चाहिए। कुछ और तथ्‍य किरलियान ने मनुष्‍य के जीवन के सामने रखे, एक फोटो में उसने दिखाया है, छ:  महीने पहले जब उसने जिस मनुष्‍य को फोटो लिया तो उसके दायें हाथ में ऊर्जा प्रवाहित नहीं हो रही थी। यानि दाया हाथ उर्जा को नहीं दर्शा रहा था। जबकि दांया हाथ ठीक ठाक था, पर ठीक छ: माह बाद अचानक एक ऐक्सिडेन्ट के कारण उस आदमी का वह हाथ काटना पड़ा।

यानि हाथ की ऊर्जा छ: माह पहले ही अपना स्‍थान छोड़ चुकी थी।

भारतीय योग तो हजारों साल से कहता आया है कि मनुष्‍य के स्थूल शरीर में कोई भी बिमारी आने से पहले आपके सूक्ष्‍म शरीर में छ: माह पहले आ जाती है। यानि छ: माह पहले अगर सूक्ष्म शरीर पर ही उसका इलाज कर दिया जाये तो बहुत सी बिमारियों पर विजय पाई जा सकती है।

इसी प्रकार भारतीय योग कहता है कि मृत्‍यु की घटना भी अचानक नहीं घटती वह भी शरीर पर छ: माह पहले से तैयारी शुरू कर देती है। पर इस बात का एहसास हम क्‍यों नहीं होता।

पहली बात तो मनुष्‍य मृत्‍यु के नाम से इतना भयभीत है कि वह इसका नाम लेने से भी डरता है। दूसरा वह भौतिक वस्तुओं के साथ रहते-रहते इतना संवेदन हीन हो गया है कि उसने लगभग अपनी अतीन्द्रिय शक्‍तियों से नाता तोड़ लिया है। वरन और कोई कारण नहीं है।

पृथ्‍वी का श्रेष्‍ठ प्राणी इतना दीन हीन। पशु पक्षी भी अतीन्द्रिय ज्ञान में उससे कहीं आगे है।

साइबेरिया में आज भी कुछ ऐसे पक्षी हैं जो बर्फ गिरने के ठीक 14 दिन पहले वहां से उड़ जाते हैं। न एक दिन पहले न एक दिन बाद।

जापान में आज भी ऐसी चिड़िया पाई जाती है जो भुकम्‍प के12 घन्‍टे पहले वहाँ से गायब हो जाती है।

और भी न जाने कितने पशु-पक्षी हैं जो अपनी अतीन्द्रिय शक्‍ति के कारण ही आज जीवित हैं।

भारत में हजारों योगी मरने की तिथि पहले ही घोषित कर देते हैं। अभी ताजा घटना विनोबा भावे जी की है। जिन्‍होंने महीनों  पहले कह दिया था कि में शरद पूर्णिमा के दिन अपनी देह का त्‍याग करूंगा।

ठीक महाभारत काल में भी भीष्‍म पितामह ने भी अपने देह त्‍याग के लिए दिन चुना था। कुछ तो हमारे स्थूल शरीर के उपर ऐसा घटता है, जिससे योगी जान जाते हैं कि अब हमारी मृत्‍यु का दिन करीब आ गया है।

आम आदमी उस बदलाव को क्‍यों नहीं कर पाता। क्‍योंकि वह अपने दैनिक कार्यो के प्रति सोया हुआ है। योगी थोड़ा सजग हुआ है। वह जागने का प्रयोग कर रहा है। इसी से उस परिर्वतन को वह देख पाता है महसूस कर पाता है।

एक उदाहरण। जब आप रात को बिस्तर पर सोने के लिए जाते है। सोने ओर निंद्रा के बीच में एक संध्या काल आता है, एक न्यूटल गीयर, पर वह पल के हज़ारवें हिस्‍से के समान होता है। उसे देखने के लिए बहुत होश चाहिए। आपको पता ही नहीं चल पाता कि कब तक जागे ओर कब नींद में चले गये। पर योगी सालों तक उस पर मेहनत करता है। जब वह उस संध्‍या काल की अवस्था से परिचित हो जाता है। मरने के ठीक छ: महीने पहले मनुष्‍य के चित्त की वही अवस्‍था सारे दिन के लिए हो जाती है। तब योगी समझ जाता है अब मेरी बड़ी संध्‍या का समय आ गया। पर पहले उस छोटी संध्‍या के प्रति सजग होना पड़ेगा। तब महासंध्या के प्रति आप जान पायेंगे।

और हमारे पूरे शरीर का स्नायु तंत्र प्राण ऊर्जा का वर्तुल उल्‍टा कर देता है। यानि आप साँसे तो लेंगे पर उसमें प्राण तत्‍व नहीं ले रहे होगें। शरीर प्राण तत्‍व छोड़ना शुरू कर देता है। ध्यान में बैठिए व सज़ग हो जाओ।

आपका ज्योतिष्य मित्र,
डॉ.सुहास रोकडे

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